Wednesday, January 4, 2017

ओरछा महामिलन भाग -2 , रामराजा और चतुर्भुज मंदिर ( Ramraja and chaturbhuj temple ,orchha )




पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा मैं खजुराहो घूमकर रामराजा की नगरी ओरछा पहुँचा था और साथ थे करीब 14 राज्यों से आए घुमक्कड़ मित्र । पिछली पोस्ट में आपने हरदौल के बारे में पढ़ा था  तो अबकी बार हम पढ़ेंगे रामराजा मंदिर , चतुर्भुज मंदिर के बारे में -

महामिलन के पहले भाग के लिए यहाँ क्लिक करें

हरदौल मंदिर के बाद हम पहुँचे रामराजा मंदिर में और इसी के साथ लगते चतुर्भुज मंदिर में । यहाँ फूलबाग में दो काफी ऊँची मीनारें हैं । इनका नाम है सावन भादों और कहते हैं सावन भादो के महिनों में ये आपस में मिल जाती हैं , जो कि असंभव है ये तभी संभव होगा जब और कई सौ साल बाद ये जर्जर होकर धरती माता से मिलने आऐंगी नीचे और ऐसी मिलेंगी के कोई  अलग ना कर पाएगा। दरअसल इन के नीचे राजपरिवार के लिए कक्ष बने थे जिनमे इनसे होकर शीतल हवा जाती था या फिर जैसा पाँडेय जी ने बताया कि ऊपर गाने बजाने वालों को बैठाया और नीचे कक्ष में  संगीत का आनंद लिया । राजाराम मंदिर और चतुर्भुज मंदिर  दोनों मंदिरों की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है ।
सावन भादों मीनार 




ये मीनारे फूल बाग में है 

   कहते हैं राजा मधुकरशाह कृष्ण भक्त थे । एक बार उन्होने रानी गणेश कुँवरी को कृष्ण उपासना के लिए वृंदावन चलने को कहा । अब मधुकर शाह तो कृष्ण भक्त थे परंतु उनकी रानी गणेश कुंवरी तो रामभक्त थी । रानी ने मना करते हुए राम उपासना के लिए अयोध्या जाने की बात कही । इस पर मधुकरशाह गुस्सा हो गए और रानी को महल छोड़ने का आदेश दिया और साथ ही कहा कि वे वापस तभी आएँ जब राम उनके साथ आना चाहें । इस पर रानी गणेश कुँवरी अयोध्या चली जाती हैं और सरयू के किनारे श्रीराम उपासना करने लगती हैं । काफी समय तपस्या के बाद भी इच्छा पूरी ना होते देख रानी सरयू की मंझधार में छलांग लगा देती हैं । रानी को प्रभु राम डूबने से बचाते हैं तो रानी गणेश कुँवरी कहती है कि प्रभु मेरी लाज रखने के लिए मेरे साथ ओरछा चलिए । श्रीराम रानी जूँ ( जूँ शायद बुंदेलखंडी में जी के लिए प्रयुक्त होता है ) को साथ चलने की सहमति प्रदान करते हैं परंतु रानी के समक्ष शर्तें रखते हैं । पहली ये कि उन्हें पैदल ओरछा पहुँचना है और दूसरी ये कि वो जहाँ एक बार स्थापित हो जाऐंगे फिर अपने स्थान से नहीं हिलेंगे ।
        रानी सहर्ष बात मान लेती हैं और ओरछा पहुँचती है । रानी के वासप पहुँचने पर महाराज मधुकरशाह बहुत प्रसन्न होते हैं और कहते है कि श्रीराम जी के लिए ओरछा में भव्य मंदिर का निर्माण करवाया जाएगा । और दोस्तों ये मंदिर था चतुर्भुज मंदिर । चतुर्भुज मंदिर का निर्माण शुरू हो जाता है तब तक श्रीराम जी की मूर्ति को रानी अपने महल में रखती हैं । कहा जाता है जब चतुर्भुज मंदिर में स्थापना के लिए भगवान राम की मूर्ति को उठाया जाने लगा तो कोई उसे हिला नहीं पाया तब सबको राम जी की शर्त याद आती है कि वो जब एक जगह विराजमान जाऐंगे तो वो फिर वो वहीं रहेंगे ।  तब चतुर्भज मंदिर की जगह महल को ही मंदिर का रूप दे दिया गया । महल में होने के कारण भगवान को राजा कहा गया और महल को रामराजा मंदिर ।  कुछ समय पश्चात चतुर्भुज मंदिर में भगवान विष्णु जी की मूर्ति को स्थापित किया गया ।  चार भुजाओं वाले विष्णु को समर्पित होने के कारण इसे चतुर्भुज मंदिर कहा जाता है । 

लेकिन जब हम इस मंदिर के गर्भगृह में पहुँचे तो मुझे यहाँ भगवान चतुर्भुज की जगह राम दरबार दिखाई दिया । वहाँ कुछ लोग फोटो ले रहे थे और जब मैं फोटो लेने के लिए पास गया तो पंडित जी ने पर्दा लगा दिया । अब कितने भी पर्दे लगा लो भई । फोटो तो मैं ले चुका था और उपासना के लिए मन ही मंदिर होता है । मंदिर बिल्कुल ओरछा महल के सामने है और काफी ऊँचे ( यहाँ मुझे शब्द याद नहीं आ रहा😐 शायद अधिष्ठान ) पर बनाया गया है । शायद इसलिए की महल से सीधे दर्शन हो सकें । फिर हम सब ऊपर गए । काफी तंग सीढ़ीयाँ और वो भी काफी ऊँची ऊँची । ये भी सुरक्षा का बढ़िया इंतजाम था । कोई खाली हाथ ही बमुश्किल चढ़ पा रहा था लड़ते हुए तो सोचिए भी मत । कुछ लोग तो चढ़े ही नहीं । चतुर्भुज मंदिर शायद ओरछा में सबसे ऊँची संरचना है । पूरा शहर ऊपर से नजर आता है ।


रामराजा मंदिर के सामने 




चतुर्भुज मंदिर का विहंगम दृश्य


चतुर्भुज मंदिर के अंदर 




बाएँ से कौशिक जी , नरेश जी , मैं ओर सचिन जांगड़ा
एक दम खड़ी सीढियां 




छत पर 


कौशिक जी के चश्मे में चतुर्भुज 


राम दरबार 


चतुर्भुज मंदिर के झरोखे से दिखता महल 






महल के पार दिखती बेतवा नदी 








पालकी महल 
 ऊपर कुछ समय बिताकर सब नीचे आए और होटल पहुँच गए । होटल में खाना लग चुका था । खाना खाने के बाद कुछ समय का विश्राम और सब फिर निकल पड़े अब हम जा रहे थे माँ बेतवा की ओर । जब हम बेतवा के किनारे पहुँचे तो मन प्रसन्न हो गया । बेतवा का पानी भी काफी स्वच्छ था । बेतवा के पार था छतरियों का शानदार नजारा । कैमरे धड़ाधड़ निकल पड़े । कुछ दूर ही था कैटरीना ट्री । अब कैटरीना ट्री क्या है ? तो जी बॉलीवुड संदरी कैटरीना का एक एड आया था स्लाईस का । वो यहीं पर फिल्माया गया था और जिस पेड़ के नीचे वो बैठी उसका नाम हो गया कैटरीना ट्री । तो कुछ आम के दिवाने पहुँच गए पेड़ के नीचे पोज देने । दिन वहीं ढल गया तो सब रवाना हुए राजा राम जी के दर्शन करने । क्योंकि दोपहर मे तो मंदिर बंद था । भई राजा है तो समय के हिसाब से चलना होगा ! और राजा है इसलिए ही पुलीस के जवान सुबह शाम सशस्त्र सलामी देते हैं । जब हम मंदिर गए तो प्रवेश से पहले जूतों के साथ साथ बेल्ट भी उतारनी पड़ी और वो इसलिए क्योंकी राजा के दरबार में कमर कस के जाने का मतलब होता है राजा को चुनौती । सिर्फ सुरक्षा बलों को ही कमर कसने की आज्ञा है । लाईन से तो हम दर्शन नहीं कर पाए तो वैसे ही बाहर से कर लिए थे। और दर्शन से याद आया कि जब दर्शन बुआ दोपहर में पहुँची थी तो लोग खाना छोड़ छोड़ के उनके दर्शन को खड़े हुए थे । मंदिर के बाद हम पहुँचे सीधे ओरछा महल में लाईट एँड साऊँड शो में जहाँ ओरछा के इतिहास को बेहतरीन ढंग से प्रस्तुत किया गया ।  वहाँ से न्कलते निकलते रात हो चुकी थी तो सीधे होटल में पहुँचे । खाना तैयार था पर पहले सबका इंट्रोडक्शन हुआ , सबका नहीं आधों का हुआ था कि सब खाने में जुट गए । खाना लेने के बाद बाकी सब का हुआ । फिर सब अपनी अपनी कथा सुना कर दूसरों की सुन कर पहुँच गए अपने अपने कमरों में। आगे का किस्सा अगली पोस्ट में । धन्यवाद
ग्रुप रामराजा मंदिर में 


इन दोनों के वजन से बुलेट की आवाज भी बदल गयी थी 


प्लेट खाली तो फ़ोन ही उठा लो 


भोजन 


बम्बइया विनोद कानून के हाथों में 


दो एडमिन है और एक तगड़ा ज्यादा है तो टोकता कैसे ?


खच खचाखच 








बेतवा के किनारे बाबा जी 


आम के , नहीं कटरीना के दीवाने 




दिन ढल गया अब आगे की कहानी अगली पोस्ट में 
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18 comments:

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    1. धन्यवाद प्रभु ।

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    1. बहुत धन्यवाद भाई ।

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    1. धन्यवाद रितेश जी ।

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  4. बढिया लेख के साथ तस्वीर एक से बढकर एक ।

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    1. धन्यवाद कपिल भाई । आपकी भी कमी रही इन तस्वीरों मेम ।

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  5. कैटरीना ट्री आम का नही अर्जुन का है , आम तो विज्ञापन की शूटिंग के लिए नकली लगाये गए थे । बढ़िया विवरण लेकिन आखिरी में जल्दबाजी कर दी ।

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    1. सॉरी शक्तिमान ।

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  6. कैटरीना ट्री आम का नही अर्जुन का है , आम तो विज्ञापन की शूटिंग के लिए नकली लगाये गए थे । बढ़िया विवरण लेकिन आखिरी में जल्दबाजी कर दी ।

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  7. इस पोस्ट को पढ़ कर समझ आया कि मैंने बहुत कुछ मिस कर दिया। चतुर्भुज मंदिर की छत तक नहीं पहुँच पाया क्योंकि हार्ट फेल होने का खतरा लग रहा था। शाम को ध्वनि व प्रकाश का कार्यक्रम भी नहीं देखा क्योंकि बड़ी जोर से नींद आरही थी और कमर भी कीर्तन करने लगी थी। इंट्रोडक्शन और रात्रि भोजन भी मिस किया। पर चलो, कोई नी! अगर सब भाई हर जगह एक साथ होते तो सबकी फोटो भी एक जैसी ही हो जातीं। अब वैरायटी देखने को मिल रही है। अगले दिन का आँखों देखा हाल पढ़ने की उत्सुकता है।

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    1. आप हमारे दिल में थे । साथ साथ घूम रहे थे ।

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  8. गजब लिखा है भाई मजा आ गया

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