Thursday, October 6, 2016

भीमेश्वरी देवी बेरी वाली माता ,हरियाणा Bhimeshwari devi temple Beri , Haryana

प्रस्तुतकर्ता - हरेन्द्र धर्रा

पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा था की हम महम चले गए थे ज्ञानी चोर की बावड़ी देखने । उस पोस्ट को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

महम से वापसी में हम बेरी की तरफ मुड़ गए । बेरी कस्बा दिल्ली से करीब 65 किमी दूर हरियाणा के झज्जर जिले में पड़ता है । ये कस्बा भीमेश्वरी देवी या स्थानीय लोग जिसे बेरी वाली माता कहते है के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है । अब हम आपको बताते हैं भीमेश्वरी देवी की पौराणिक कथा और इस कस्बे का नाम बेरी कैसे पड़ा ।

     माना जाता है कि जब कुरूक्षेत्र में महाभारत युद्ध हुआ तो भगवान कृष्ण के सुझाव पर कुंती ने पांडवों को अपनी कुलदेवी का आशिर्वाद लेने के लिए कहा । तो भीम कुलदेवी का आशिर्वाद लेने और उनको युद्ध भूमि लाने के लिए हिंग्लाज पर्वत जो अब पाकिस्तान में है पर पहुँचे ।वहाँ जाकर वे देवी की आराधना करते है भीम के सब बताने के बाद कुलदेवी उनके साथ मूर्तिरूप में चलने के लिए मान जाती है परंतु एक शर्त रखती हैं कि अगर भीम रस्ते में मूर्ति को कहीं नीचे रख देंगे तो वे आगे नहीं जाऐंगी व वहीं स्थापित हो जाऐंगी । भीम सहर्ष मान जाते हैं और मूर्ति को उठाकर चल पड़ते हैं । जब वे आज के बेरी कस्बे के पास पहुँचते हैं तो उनहे लघुशंका होती है और वे माता की मूर्ति को एक बेरी के पेड़ के नीचे रख कर निवृत होने चले जाते है । जब वे नहा धोकर वापस आकर मूर्ति को उठाने लगते हैं तो माता उन्हे शर्त याद दिलाती हैं और चलने से मना कर देती हैं । तो भीम उनकी आशिर्वाद लेकर वापस लौट जाते हैं । उस समय यहाँ जंगल हुआ करता था और यहीं से कुछ दूर दुर्वासा ऋषि निवास करते थे । उनके आग्रह पर माता अपने स्थान से हटने और उनके बनाए आश्रम में सेवा स्वीकार करने को राजी हो जाती हैं । तब हर रोज ऋषि उनकी जगह बदलने लग जाते हैं और रोज उनकी पूजा करते हैं । युद्ध खत्म होने के बाद रानी गांधारी यहाँ मंदिरों का निर्माण कराती हैं । कहते हैं आज भी वहीं आरती गाई जाती है जो ऋषि दुर्वासा गाते थे और उनकी तरह ही आज भी मूर्ति का स्थान रोज बदला जाता है । रात को उन्हे अंदर वाले मंदिर ले जाते हैं और दिन में माता बाहर वाले मंदिर में विराजमान होती है । यहाँ बेरी का वृक्ष होने के कारण इन्हे बेरी वाली माता कहा गया और भीम द्वारा लाने के कारण इनकी नाम पड़ा भीमेश्वरी । समय के साथ साथ यहाँ लोग बसने शुरू हो गए और कस्बे का नाम उसी प्रकार बेरी हो गया ।
                                                       तो हम उस दिन दोपहर को बेरी पहुँच गए । सबसे पहले जूस का गिलास मारकर खाना खाया गया । फिर पार्क में कुछ समय विश्राम के बाद हमने गूगल मैप को मंदिर ले चलने का आदेश दिया । आदेश मानते हुए गूगल बाबा हमें अंदर वाले मंदिर ले गए पतली पतली गलियों से । मंदिर पहुँचने पर हमें अपनी अपेक्षाओं के अनूरूप सुंदर मंदिर नहीं मिला । क्योंकी हम दोनों ही इतने ज्यादा आस्तिक नहीं थे के वहाँ की आध्यात्मिक खूबसूरती को महसूस कर पाते । हम तो बस वास्तुकला के पुजारी थे तो बस अंदर अधिक भीड़ देखकर माता को बाहर से ही प्रणाम करके निकल लिए । प्रसाद वगैरह हमने लिया ही नहीं था। फिर हम पहुँचे माता के बाहरी मंदिर । ये मंदिर बहुत भव्य बन रहा है और अभी काम चल रहा है । ये मंदिर हमारी यात्रा को सार्थक बना रहा था क्योंकी हमारे लिए मंदिर ही मुख्य आकर्षण था । कुछ समय वहाँ गुजारने के बाद हम वापस चल निकलते हैं घर की और । अब आप भी नीचे वाले फोटो देख लिजिए । जय माता दी ।
भैंसों का स्विमिंग पूल 

नारी शक्ति 

मौसम सुहाना है 

सैम्पल 

रोहतक भिवानी 

लघुशंका क्या सिर्फ भीम को हो सकती है 

आधे रोड़ पर कब्ज़ा 

विद्या विनय पहले देती होगी आजकल तो टीचर को मार भी देते है 

इस तक जाने का रस्ता ही नहीं था 

पहले पेट पूजा फिर माता की पूजा 

सैनी साब 

अन्दर वाला मंदिर 

पार्क में हरयाली और रास्ता 

नया बाहरी मंदिर 

बाहरी मंदिर 

मंदिर निर्माणाधीन है 

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