Sunday, August 7, 2016

शाह जी या जानी चोर की बावड़ी ,महम हरियाणा ( shah ji ki bawadi , meham haryana )

सात अगस्त को मैं और नितीश ,दोनों निकल पड़े बाईक लेकर महम की तरफ । महम हरियाणा के रोहतक जिले में पड़ता है । रोहतक जिले में यह एक प्रमुख शहर और तहसील है । महम राष्ट्रीय राजमार्ग 10 ( NH 10 ,इस नाम की तो फिल्म भी है ) पर पड़ता है और दिल्ली और सिरसा के बीच एक प्रमुख स्टॉप है । राजनिती में भी महम खास अहमियत रखता है । पर हम इन कारणों से महम नहीं जा रहे थे । हमारे जाने का एक और कारण था जिसके लिए भी महम प्रसिद्ध है । और वो है शाहजी की बावड़ी या कहिए महम की बावड़ी या फिर सबसे प्रचलित नाम ज्ञानी चोर की बावड़ी या गुफा । इसके पत्थर पर लिखा अधिकारिक नाम है ‘स्वर्ग का झरना’ जो यहाँ फारसी भाषा में लिखा है ।
      हमारे गाँव से महम की दूरी है सत्तर किलोमीटर । हम सुबह नौ बजे निकल पड़े बाईक लेकर । सवा घंटे में हम महम पहुँच चुके थे । महम जाकर पूछा कि बावड़ी किधर है तो एक आदमी ने कहा कि मैं नहीं जानता । जाहिर सी बात थी कि ये बंदा यहाँ का नहीं है फिर एक रहड़ी वाले से पूछा तो उसने रस्ता बता दिया । जाने से पहले नेट पर एक पुरानी दो तीन साल पुरानी एक खबर मिली की बावड़ी बड़ी बुरी हालत में है सीढ़ीया टूट रही है एक दिवार भी गिर चुकी है चारों तरफ अतिक्रमण हो चुका है । ये पढ़ कर मन में था कि पता नहीं किस हालत में होगी । तो हम वहाँ पहुँच गए और देखा कि ये पुरातात्विक विभाग ने अपने कब्जे में लिया हुआ है । चारों तरफ रेलिंग लगाई गई है और सफाई तो बहुत ज्यादा  थी लेकिन सिर्फ बाहर अन्दर नहीं। पास गए तो देखा कि दिवार और सीढ़ियाँ दोबारा बना दी गई हैं । हम गए तो वहाँ कुछ ही लोग थे । तो दिमाग में हुआ की मन में थोड़ी ज्यादा ही घटिया इमेज बना ली थी । यहाँ देखा कि बावड़ी की भी ठीकठाक देखरेख है और लोगबाग भी आते हैं देखने ।
              तो अब बावड़ी के बारे में कुछ बाते भी पढ़ लिजिए । मुगलकाल की ये बावड़ी देखने लोग इसलिए कम आते है कि ये एक ऐतिहासिक मुगल संरचना है । बल्कि इसलिए ज्यादा आते हैं कि इससे ज्ञानी चोर या जानी चोर से जुड़े रहस्यमयी किस्से कहानियाँ जुड़े हैं । सबसे प्रचलित कहानी है कि ज्ञानी चोर अपना देसी रॉबिन हुड था । सिर्फ अमीरों को लूटता था और गरीबों की मदद करता था । लूटने के बाद वो अपने घोड़े समेत बावड़ी में छलांग लगा देता था और बावड़ी के अंदर बनी सुरंगों के जाल में छुप जाता था जिसकी जानकारी सिर्फ उसी को थी । अगले दिन फिर राहजनी को निकल जाता था । कहते हैं ये सुरंगें दिल्ली हिसार और यहाँ तक की लाहौर को भी जाती थी । और ज्ञानी चोर का लूटा हुआ अरबों का धन भी कहते हैं इन्हीं सुरंगों में दफ्न है । ज्ञानी चोर के बाद जो भी इन सुरंगों में गया वो फिर लौट के नहीं आया । एक और कहानी प्रचलित है कि अंग्रजों के जमाने में किसी बारात को दिल्ली जाना था । तब पैदल ही जाना पड़ता था तो बारात धूप से बचने और जल्दी पहुँचने के लोभ में ज्ञानी चोर की सुरंगों में उतर गई । पर इन सुरंगों के जाल का किसी को ज्ञान नहीं था तो वे लोग रास्ता भटक गए और ना तो बारात से कोई दिल्ली पहुँचा और ना ही वापस आया । और इस बात का पता सरकार को चलने के बाद अंग्रेजी हुकूमत ने इन गुफाओं या सुरंगों को बंद करवा दिया था । कुछ लोग कहते हैं कि इसे सेनाओं के आराम के लिए बनाया गया था । यहाँ पानी और छाँव के लिए वो यहाँ डेरा डालते थे ।
                  तो ये तो थी किस्से कहानियों की बातें । अब देखते है इतिहासकारों के नजरिए से । बावड़ी में लगे शिलालेख के अनुसार इस बावड़ी का नाम है स्वर्ग का झरना । और इसका निर्माण 1658 - 59 के बीच शाहजहाँ के सूबेदार सैदू कलाल ने करवाया था । पुराने जमाने में पानी की जरूरतों के लिए भी बावड़ियों का निर्माण होता था । इस बावड़ी का निर्माण पानी की जरूरत के साथ साथ राहगीरों के आराम के लिए भी कराया गया था । यहाँ छोटे छोटे कक्ष भी बने हैं । कुएं तक जाने के लिए कई सीढ़ियाँ उतरनी पड़ती हैं । वैसे चारो तरफ से उतने के लिए भी सीढ़ियाँ है । कुएं के बगल में एक हौद भी बना है । हांलांकी कुए का पानी बिल्कुल सड़ चुका है लोहे के दरवाजे भी जर्जर हो चुके हैं । पर अब कई जगह मरम्मत की गई है बड़े अच्छे तरीके से । पहली नजर में लगता ही नहीं कि ये मरम्मत की गई है । बावड़ी के चारों तरफ लोहे की रेलिंग लगा दी गई है चारों तरफ घास भी लगा दी गई है और बहुत बढ़िया तरीके से ध्यान भी रखा जा रहा है लेकिन कुएँ में और उसके आस पास बहुत कूड़ा पड़ा था पानी में पोलोथीन बैग पड़ी थी । वैसे तो इसके सौ मीटर तक कोई निर्माण नहीं कर सकते पर यहाँ रेलिंग से थोड़ी दूर पर ही निर्माण हो चुके हैं । पर मैं निजी तौर पर प्रशासन के कार्यों से संतुष्ट हूँ लेकिन सिर्फ मरम्मत के लिए , अंदर की सफाई के लिए बिल्कुल नहीं।  क्योंकी बाहरी सुंदरता से अधिक अांतरिक सुंदरता भी जरूरी है ।ये तो आप भी मानते होंगे । अब देखिए कुछ चित्र ।
बोर्ड पे लिखा है की भाई सौ मीटर क्र भीतर कुछ न बनाओ पर लोग सुनते कहाँ है ?


बाहर से 

नितीश 



सीढियां 

नितीश के सामने जो दरवाजा है वो कुएं में जाता है 

कुएं के अंदर से असमान का चित्र 

दरवाजों के बीच से दूर दिखती सीढियां 

ये मैं ! नाम तो कैसे सुना होगा 

मध्य तल 


काला पड़ा पानी और कूड़ा 


एक बार फिर 

इस पर फारसी में लिखा है 

ये साइड से उतरने के लिए 

अब कुआ ऊपर से 

सुन्दर है न 



नयी दीवार 

नितीश के अनुसार तो यहीं गुफा थी अब बंद है 





अस्त्र शस्त्र 


सौ मीटर में तो गोसे पथ रहे हैं