Wednesday, August 13, 2014

हरिद्वार आटो यात्रा : हर की पौड़ी और मनसा देवी ( haridwar auto yatra -4 )

प्रस्तुतकर्ता : हरेन्द्र धर्रा
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अगले दिन सुबह उठ कर हाथ मुंह धोकर चाय बनाकर पी और फिर गंगा की तरफ टहलने गए थे कछुए महाराज के दर्शन हुए | वाह कल नाग देवता के रूप में भोले के दर्शन हुए थे आज विष्णु भगवान के दर्शन हो गए | उसे उठाकर ले आए और राजघाट कि तरफ गंगा में छोड़ दिया |
                  नहा धोकर खाना खाकर हम लोग हर की पौड़ी की ओर चल दिए | वहां जाकर गंगा में पुन: स्नान कियाऔर बाजार से होते हुए हम मनसा देवी के दर्शन हेतु चल पड़े |
         पहले हम पहुंचे उडन खटोले के काउंटर पर | लेकिन भीड़ को देखकर मन बदल गया ,हमने पैदल जाना उचित समझा | वैसे भी हम तो सिर्फ उसमें बैठकर देखना चाहते थे |
          जब चढ़ने लगे तो मैं थोड़ा तेजी से बिना रूके सारे शार्टकट इस्तेमाल करता हुआ जल्दी ही मंदिर पर था | पीछे देखा कि शायद वे लोग आ रहे होंगे ,पर कोई नहीं दिखा ,मैने सोचा थोड़ा आराम से आ रहे होंगे | पन्द्रह मिनट बाद भी जब ना आए तो मैने फोन मिलाया पर फोन लग ही ना रहा था तब थोड़ी देर बाद फोन तो लगा पर कुछ समझ में नही आया | दो तीन बार मिलाया तब पता चला की आ रहे हैं आराम आराम से | और आधा घन्टे बाद भाईयों के दर्शन हुए |
    ये पौना घण्टा कैसे कटा मेरे को पता था बार बार एक पुलिस वाला आता
" भाई साब थोड़ा मोड़ से हटिये दिक्कत हो रही है "
" सर दो मिनट बस आ गए ,आने वाले हैं"
   पका दिया उसने बिल्कुल | फिर माता के दर्शन किए | और निकल पड़े | वापस आकर ईधर उधर हर जगह की खाक छानने के बाद वापस कनखल की तरफ रुख किया | आए तब तक अंधेरा होने लगा था | आकर खाना पीना होने के बाद रात को दक्ष जी से मिलने पहुंचे उनके मंदिर |
               पर ये क्या ? बहुत जलदी सो गए दक्षेश्वर महाराज ,हम गए तो कपाट बन्द हो चुके थे | दुकाने भी बंद होने लगी थी सो वापस आकर फिर नहाए नलके पे | नलके का पानी गजब का ठंडा था बर्तन में डालते ही ओस आ जाती थी | नहा कर सोने की तैयारी कर दी |
       बाकी अगली पोस्ट में |
चाय गरम
कछुए महाराज
गंगास्नान
हाय तेरा टशन
मंशा देवी के मंदिर से
दर्शन हेतु लाईन में
वापसी
लंगूर महाराज
पिछे दिखता हरिद्वार
एक लंगूर हसनगढ़ का एक हरिद्वार का
हर की पौड़ी
गंगा मैया
शंभू



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